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दादा दिखा रहे धौंस, अनुशासन के लिए दादी ने उठाई छड़ी

दादा भी कोरोना वायरस महामारी से बचने के लिए सभी जुगत करने में जुटे हैं। माता-पिता, भाई, बहन बेहतर अभिभावक की भूमिका निभाते हुए नजर आ रहे हैं।

दूसरे प्रदेशों से आए क्वारंटाइन किए गए परिवार के सदस्यों को नियम का पालन कराने के लिए जोर जबरदस्ती कर उन्हें किसी से न मिलने जाने की नसीहत दे रहे। बड़े- बुजुर्गों की इस चिता से स्वास्थ्य परिवार व स्वस्थ समाज की परिकल्पना की नई इबारत लिखी जा रही है।

लॉकडाउन में दूसरे प्रदेशों में फंसे लोगों का घर पहुंचने का सिलसिला जारी है। अपनों के बीच पहुंचकर प्रवासी जितने गदगद है,

उससे भी ज्यादा खुशी घर के अभिभावकों में हैं। क्वारंटाइन किए गए सैकड़ों प्रवासी ऐसे हैं जो कि शारीरिक दूरी का अनुपालन करने में लापरवाही बरत रहे हैं। इन लापरवाह प्रवासियों के क्रियाकलापों पर नजर रख घर के अभिभावक खुद व दूसरों को सुरक्षित रखने की सलाह दे रहे हैं।

दुबेपुर विकास खंड के उघरपुर गांव निवासी भोलानाथ यादव दिल्ली से आए अपने बेटे सहदेव को 21 दिन क्वारंटाइन अवधि में चल रहे बेटे को वे कहीं जाने नहीं देते हैं।

यही हाल अहमदाबाद से आए अखंडनगर के राकेश की दादी सुखना का है। वह होम क्वारंटाइन किए गए पोते पर नजर रखने के लिए चौकीदारी कर रही हैं

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